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Roti For Weight Loss | Butter Roti | Bajra Roti For Weight Loss - YouTube

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Roti For Weight Loss | Butter Roti | Bajra Roti For Weight Loss

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TAGS: #DroidReaders.com HERE #iAhmedSheraz हिन्दी اردو روٹی | گندم | وزن کم کرنے کے لیے روٹی | مکھن روٹی | وزن کم کرنے کے لیے باجرہ کی روٹی | اناج | Roti | Wheat | Roti For Weight Loss | Butter Roti | Bajra Roti For Weight Loss | Grain | रोटी | गेहूं | वजन घटाने के लिए रोटी | मक्खन रोटी | वजन घटाने के लिए बाजरा रोटी | अनाज | اردو || وزن کم کرنے کے لئیے روٹی | مکھن روٹی |  روٹی हिन्दी लिए रोटी बटर ब्रेड | बाजरे की रोटी باجرہ کی ایک روٹی! سولہ گھنٹے بغیر تھکن کام جو لوگ بھوک کی کمی‘ گیس‘ ضعف معدہ جیسے امراض میں مبتلا ہوتے ہیں وہ کم لیسدار اجزا والے اس موٹے اناج کو استعمال کریں تو بدہضمی اور گیس جیسے امراض سے چھٹکارا مل سکتا ہے۔ باجرے کو مستقل استعمال میں رکھنے سے بدن ہلکا پھلکا رہتا ہے اللہ تعالیٰ کی بے پناہ نعمتوں میں سےا ناج بہت اہم نعمت ہیں‘ مختلف اناج ہماری روزہ مرہ غذا کا ایک اہم حصہ ہیں۔ اناج کیلئے عام اور سستی غذاؤں میں طاقت کا خزانہ مل جاتا ہے‘ یہاں چند چیزوں کا ذکر کیا جارہا ہے جَوبظاہر معمولی نوعیت کی ہیں مگر انتہائی طاقتور ہیں۔ باجرہ: باجرہ ایک ایسا اناج ہے جو بدن کو بھرپور غذائیت دینے کے ساتھ ساتھ نزلہ‘ زکام بھی دور کردیتا ہے۔ اطباء کی تحقیق کے مطابق اس میں جسم کی چربی کم کرنے اور اعصاب کو طاقت پہنچانے کا اہم ذریعہ ہے۔ عام طور پر اسے غریبوں کا اناج کہا جاتا ہے۔ راجستھان اور خشک علاقوں کا مزدور طبقہ باجرے کی روٹی کھا کر پندرہ سے سولہ گھنٹے محنت کرتا ہے اور تھکن محسوس نہیں کرتاجو لوگ بھوک کی کمی‘ گیس‘ ضعف معدہ جیسے امراض میں مبتلا ہوتے ہیں وہ کم لیسدار اجزا والے اس موٹے اناج کو استعمال کریں تو بدہضمی اور گیس جیسے امراض سے چھٹکارا مل سکتا ہے۔ باجرے کو مستقل استعمال میں رکھنے سے بدن ہلکا پھلکا رہتا ہے‘ برس ہا برس سے حکیم صاحبان یہ بتاتے رہے ہیں کہ باجرہ کو گڑ‘ شکر‘ گھی یا دیگر کھانے میں تیلوں میں ملا کر کھانے سے کمر مضبوط اور خون عمدہ و ہاضمہ درست رہتا ہے اور پیٹ کی چربی میں کمی کے ساتھ گیس بھی نہیں بنتی۔ چنا: اس مشہور غلے میں جسمانی نشوونما کیلئے درکار تمام اجزاء پائے جاتے ہیں۔ چنے کے چھلکوں میں پیشاب آور صلاحیت پائی جاتی ہے۔ بھنے ہوئے چنوں کو چھلکوں سمیت کھانا نزلہ زکام کے مستقل مریضوں کیلئے بہترین ٹانک ہے‘ گرم خشک تاثیر کی وجہ سے بلغم اور سینے و معدہ کی فاضل رطوبت کو خشک کرتا ہے۔ چنے کو چوبیس گھنٹے بھگونے کے بعد نہار منہ اس کا پانی نتھار کر پی لیا جائے تو جلدی امراض کیلئے بے حد مفید ہے۔ خارش اور جلد کی رطوبت کی بیماریوں میں یہ نہایت فائدہ مند ہے‘ بھیگے ہوئے چنے خوب اچھی طرح چبا کر استعمال کرنے سے وزن بڑھتا ہے‘ یہ خون کو صاف کرتا اور سدوں کا خاتمہ کرتا ہے۔ ایسے جانور جن کی غذا میں چنا شامل ہوتا ہے وہ اچھا دودھ اور بہتر گوشت فراہم کرتے ہیں۔ اس میں موجود نائٹروجن اور ہائیڈروجن کاربن کی خفیف مقدار جانوروں میں چربی پیدا کرکے جسم کی قوت اور حرارت کو مجتمع رکھتی ہے۔ یورپ اور دیگر مغربی و ایشیائی ممالک میں اسے گوشت کا بہترین نعم البدل سمجھا جاتا ہے۔ کچا چنا ’’اولہ‘‘ جسے بچے بڑے سبھی شوق سے کھاتے ہیں وٹامن ’’ای‘‘ کی فراہمی کی وجہ سے اعضائے رئیسہ کی حفاظت اور نسل انسانی کی ذرخیزی و توانائی میں معاون ہے۔ یہ وٹامن تازہ دانے دار گندم‘ بادام‘ پستہ‘ چنے‘ مٹر اور دیگر پھلوں کے سبز چھلکوں میں پایا جاتا ہے۔ چنے میں موجود وٹامن ’’بی‘‘ دل کی کارکردگی بڑھاتا ہے۔ دماغ‘ جگر‘ دانتوں اور ہڈیوں کیلئے مفید ہے اور اعصاب گردہ و ہاضمہ کیلئے مددگار ہے۔ وٹامن بی تمام تازہ اناجوں کے چھلکوں اور بیجوں میں بکثرت پایا جاتا ہے۔ چنے کو چھلکوں سمیت استعمال کرنے سے امراض گردہ اور پتھری بننے کے عمل سے نجات مل سکتی ہے۔ مکئی: مکئی‘ کلو‘ مکا ایک ہی غذائی جنس کے مختلف نام ہیں‘ پاکستان میں سردیوں کے موسم میں عام پیدا ہوتی ہے۔ نیم پختہ بھٹہ کو ئلوں پر بھون کر کھایا جاتا ہے جو نہایت لذیذ اور بھوک کو تسکین دیتا ہے لیکن یہ سیاہ مرچ‘ نمک لیموں کے بغیر کھانے سے ذرا دیر میں ہضم ہوتا ہے اور معدہ میں فاسد مادے پیدا کرنے کا باعث بنتا ہے۔ مکئی کے آٹے کی روٹی‘ مقوی دماغ اور مصفی خون ہے۔ اس کا آٹا پانی میں گھول کر رخساروں پر ملنے سے کیل مہاسے دور ہوتے ہیں‘ ہاتھوں میں لگانے سے ہاتھوں کی خشکی اور ہر قسم کی بدبو زائل ہوجاتی ہے لیکن عام طور پر اس کا آٹا انسانی جسم کے تمام اعضاء کیلئے مفید نہیں ہے۔ اس کی روٹی دودھ‘ گھی‘ شکر اور گندم کے آٹے کو ملا کر پکائی جائے تو انسانی جسم کیلئے بہت فائدہ دیتی ہے۔ مکئی کے دانوں کو گھی یا تیل میں بھون کر پاپ کارن کی شکل میں بڑے شوق سے کھایا جاتا ہے۔ سردیوں میں مکئی کے دانوں یا بھٹے کا استعمال خوب مزہ دیتا ہے۔ موٹاپا کسی کو پسند نہیں آتا اور جس شخص کا پیٹ باہر آرہا ہو اس کی پریشانی سمجھنے والی ہوتی ہے لیکن توند(پیٹ) کی چربی کم کرنا آسان کام نہیں البتہ باورچی خانے میں رکھی اجوائن ایسا مصالحہ ہے جو چربی گھلانے میں مددگار ثابت ہوسکتا ہے۔ اجوائن اپنے منفرد ذائقے اور مہک کے باعث تقریباً ہر گھر میں ہی موجود ہوتی ہے لیکن کیا آپ جانتے ہیں یہ مصالحہ بدہضمی اور موٹاپے کو کم کرنے میں بہت معاونت فراہم کرتا ہے۔ آئیے آپ کو اجوائن سے پیٹ کی چربی کم کرنے کا طریقہ بتاتے ہیں۔ اجوائن کے ذریعے پیٹ کم کرنے کا ایک طریقہ تو یہ ہے کہ ایک کھانے کے چمچ اس کے بیج لیں اور ایک لیٹر پانی میں ابال کر اسے دن بھر استمعال کریں اور اجوائن کا پانی پینا اپنی عادت بنالیں۔ اجوائن نظام ہاضمہ کو بہتر جبکہ خوراک کے جذب ہونے میں مدد فراہم کرتی ہے جس سے چربی جمع ہونے کے بجائے کم ہوجاتی ہے اور پیٹ میں تیزی سے کمی آتی ہے۔ دوسرا طریقہ یہ ایک چھوٹا چمچہ اجوائن ناشتے سے آدھا گھنٹہ قبل چبالی جائے یہ بھی موٹے پیٹ سے نجات دینے میں مدد کرتی ہے۔ ایسا کرنے سے جسم کو ناشتے کے ساتھ ساتھ رات کے کھانے کو ہضم کرنے میں مدد ملتی ہے جبکہ میٹابولزم کی رفتار بھی بڑھتی ہے جس سے چربی تیزی سے اور موثر طریقے سے گھلتی ہے۔ बाजरे की रोटी की एक रोटी! सोलह घंटे का अथक परिश्रम जो लोग भूख न लगना, गैस, अपच जैसे रोगों से पीड़ित हैं, वे कम चिपचिपे पदार्थों वाले इस मोटे अनाज का उपयोग करके अपच और गैस जैसी बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। बाजरे के नियमित सेवन से शरीर हल्का रहता है अल्लाह सर्वशक्तिमान के असंख्य आशीर्वादों में, नाज एक बहुत ही महत्वपूर्ण आशीर्वाद है विभिन्न अनाज हमारे दैनिक आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अनाज के लिए सामान्य और सस्ते खाद्य पदार्थों में ऊर्जा का खजाना होता है। यहां कुछ चीजें हैं जो मामूली लगती हैं लेकिन बहुत शक्तिशाली हैं। बाजरा: बाजरा एक ऐसा अनाज है जो शरीर को पूरा पोषण देने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम को भी ठीक करता है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार यह शरीर की चर्बी को कम करने और नसों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसे आमतौर पर गरीबों का अनाज कहा जाता है। राजस्थान और शुष्क क्षेत्रों के मजदूर वर्ग बाजरे की रोटी खाने के बाद पंद्रह से सोलह घंटे काम करते हैं और थकान महसूस नहीं करते हैं तो आप अपच और गैस जैसी बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। बाजरे के लगातार सेवन से शरीर हल्का रहता है।कई वर्षों से ऋषि-मुनियों का कहना है कि बाजरे को गर, चीनी, घी या अन्य खाद्य पदार्थों में तेल मिलाकर खाने से पीठ मजबूत रहती है और खून भी अच्छा रहता है और पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। अच्छा हो और पेट की चर्बी कम होने से गैस नहीं बनती है। चना: इस लोकप्रिय अनाज में शारीरिक विकास के लिए आवश्यक सभी तत्व होते हैं। लेमनग्रास में मूत्रवर्धक क्षमता होती है। जुकाम और फ्लू के मरीजों के लिए छिलके समेत भुनी हुई दाल खाना एक बेहतरीन टॉनिक है। चने को 24 घंटे तक भिगोने के बाद चर्म रोगों में अत्यंत लाभकारी होता है। त्वचा की खुजली और नमी के रोगों में यह बहुत उपयोगी है।भीगे हुए चने को चबाकर खाने से वजन बढ़ता है।यह खून को साफ करता है और कब्ज को दूर करता है। अपने आहार में चने को शामिल करने वाले पशु बेहतर दूध और बेहतर मांस प्रदान करते हैं। इसमें नाइट्रोजन और हाइड्रोजन कार्बन की थोड़ी सी मात्रा जानवरों की चर्बी पैदा करके शरीर की ताकत और गर्मी को जोड़ती है। यूरोप और अन्य पश्चिमी और एशियाई देशों में इसे मांस का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। कच्चा चने "ओला" जो बच्चों द्वारा बड़े उत्साह के साथ खाया जाता है, विटामिन ई के प्रावधान के कारण, महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा और मानव जाति की प्रजनन क्षमता और ऊर्जा में मदद करता है। यह विटामिन ताजा दानेदार गेहूं, बादाम, पिस्ता, चना, मटर और अन्य फलों के हरे छिलके में पाया जाता है। चने में मौजूद विटामिन बी हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। मस्तिष्क, यकृत, दांत और हड्डियाँ उपयोगी होती हैं और नसें गुर्दे और पाचन के लिए सहायक होती हैं। सभी ताजे अनाजों की भूसी और बीजों में विटामिन बी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। छिलकों के साथ चने का प्रयोग करने से गुर्दे की बीमारी और पथरी बनने से छुटकारा मिल सकता है। मक्का: मक्का, किलो, मक्का एक ही खाद्य जीनस के अलग-अलग नाम हैं।यह पाकिस्तान में सर्दियों के मौसम में आम है। अर्ध-पका हुआ भट्ठा चूल्हे पर तला हुआ खाया जाता है जो बहुत स्वादिष्ट और भूख को संतुष्ट करता है लेकिन यह काली मिर्च, नमक और नींबू खाए बिना कम समय में पच जाता है और पेट में अशुद्धियों का कारण बनता है। मक्के के आटे की रोटी पौष्टिक मस्तिष्क और रक्त शोधक है। इसके आटे को पानी में घोलकर गालों पर मलने से कील-मुंहासे दूर हो जाते हैं हाथों में लगाने से हाथों का सूखापन और हर तरह की दुर्गंध दूर हो जाती है लेकिन सामान्य तौर पर इसका आटा मानव शरीर के सभी अंगों के लिए उपयोगी नहीं होता है। इसकी रोटी में दूध, घी, चीनी और गेहूँ का आटा मिला दिया जाए तो यह मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मक्के की गुठली को घी या तेल में तल कर पॉपकॉर्न के रूप में बड़े चाव से खाया जाता है. सर्दियों में मक्के की गुठली या भट्ठों का प्रयोग बहुत ही आनंददायक होता है. अजवाइन अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के कारण लगभग हर घर में मौजूद होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मसाला अपच और मोटापे को कम करने में बहुत मदद करता है। आइए हम आपको बताते हैं कि अजवाइन से पेट की चर्बी कैसे कम करें। अजवाइन से पेट कम करने का एक तरीका यह है कि इसके बीज का एक बड़ा चम्मच लें और इसे एक लीटर पानी में उबालें और पूरे दिन इसका इस्तेमाल करें और अजवाइन का पानी पीने की आदत डालें। अजवाइन पाचन में सुधार करता है और भोजन के अवशोषण में मदद करता है जो वसा को जमा करने के बजाय कम करने में मदद करता है और पेट की ऐंठन को भी कम करता है। दूसरा तरीका है नाश्ते से आधा घंटा पहले एक चम्मच अजवाइन चबाना, इससे पेट की चर्बी भी दूर होती है। ऐसा करने से शरीर को नाश्ते के साथ-साथ रात के खाने को पचाने में मदद मिलती है, साथ ही चयापचय में तेजी आती है जो वसा को तेजी से और अधिक कुशलता से भंग करने में मदद करता है। सवाल जवाब | Roti | Wheat | Roti For Weight Loss | Wheat Protein | Bajra Roti For Weight Loss | Butter Roti | Roti, Wheat, Roti for weight loss, Bajra roti for weight loss, Wheat protein, Roti is good for weight loss, Best roti for weight loss, Butter roti, Wheat grain, Wheat variety, Whole wheat, Wheat bran, Durum wheat, How much roti should be eaten in a day?, What happens if you eat roti with tea?, Does eating roti make you gain weight fast?, What happens if you eat hot roti, Is it better to eat bread or rice?, What should not be eaten immediately after roti?, What happens if you eat roti with desi ghee?, What happens if you eat stale roti?, At what time is it considered right to eat roti?, Why do we eat roti with cold milk in the morning?, What is the effect on health by eating 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